अपनो ने धुतकारा।
गैरों ने सुनाया।
यह निःसंतान दंपतियों की पीड़ा।
कोई समझ न पाया।।
मां बनने की चाहत।
पिता के दायित्व का अनुभव।
हमदोनो के खवाबों को झुठलाया।
हमारी दुनिया में कुछ नज़र न आया।
पत्नी को बांझ बुलाया।
पति को नामर्द समझा गया।
हमारी पीड़ा तो बस हमे ही समझ आया।।
हमदोनो ने हिम्मत दिखाया।
खुद पर विश्वास बनाया।
डॉक्टर से दिखाया।
अपना ईलाज करवाया।।
आईवीएफ की तकनिक।
अंधेरे में रौशनी लाया।
हमदोनो की गोद में।
एक नन्हा सा मेहमान आया।।
आज अपनी दुनिया हुई पूरी।
अधूरे सपने हुए पूरे।
यह थी एक निःसंतान दंपति की ज़ुबानी।